पेट्रोल पर 3.5, डीजल पर 24 रुपए, तेल के निर्यात पर टैक्स बढ़ा

Windfall Tax: केंद्र सरकार ने 3 अगस्त से पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा दिया है. आइए जानते हैं इस फैसले का तेल कंपनियों और बाजार पर क्या असर पड़ेगा.
Petrol Diesel Price Tax: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और तेल कंपनियों की कमाई को देखते हुए केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में एक बार फिर बदलाव किया है. नए आदेश के मुताबिक, 3 अगस्त यानी आज से पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाला टैक्स को पहले के मुकाबले और ज्यादा चुकाना होगा. सरकार ने समय-समय पर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, निर्यात मार्जिन और तेल कंपनियों के मुनाफे को देखते हुए यह फैसला लिया है.
विंडफॉल टैक्स का का खास मकसद उन एकस्ट्रा मुनाफों पर कर लगाना है, जो तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के दौरान हासिल होते हैं. हालांकि, इस बड़े बदलाव का असर फिलहाल घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर नहीं पड़ा है.
कितना बढ़ा विंडफॉल टैक्स?
- पेट्रोल निर्यात पर टैक्स 2.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.5 प्रति लीटर कर दिया गया है.
- डीजल निर्यात पर टैक्स 15.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर 24 प्रति लीटर कर दिया गया है.
- सरकार ने यह बदलाव आज यानी 3 अगस्त से लागू कर दी है.
- क्या होता है विंडफॉल टैक्स?
- जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो तेल उत्पादक और रिफाइनिंग कंपनियों को एक्स्ट्रा मुनाफा होता है.
- इसी एकस्ट्रा फायदे पर सरकार विशेष कर लगाती है, जिसे विंडफॉल टैक्स कहा जाता है.
- इसका खास मकसद असाधारण मुनाफे के एक हिस्सा को सरकारी राजस्व में शामिल करना होता है.
पहले भी हुए थे बड़े बदलाव
- हाल की समीक्षा में डीजल निर्यात कर को पहले 8.5 से बढ़ाकर 15.5 प्रति लीटर किया गया था.
- एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) पर टैक्स 7.5 से बढ़ाकर 14.5 प्रति लीटर किया गया था.
- पेट्रोल पर पहले टैक्स घटाकर 2.5 प्रति लीटर किया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 3.5 प्रति लीटर कर दिया गया है.
क्या आम लोगों पर पड़ेगा असर?
- फिलहाल यह टैक्स बदलाव सिर्फ निर्यात होने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू है.
- वहीं, घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है.
- हालांकि, वैश्विक तेल बाजार के उतार-चढ़ाव और सरकारी नीतियों के आधार पर आगे की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है.



